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किशोरावस्था Educational Psychology

किशोरावस्था में सभी किशोर-किशोरियों का सामाजिक परिवेश विस्तृत ह जाता है  जिससे उनके शारीरिक मानसिक के साथ- साथ सामजिक विकास भी होता है|

किशोरावस्था में बदलते परिवेश व संबंधों के परिणामस्वरूप किशोर- किशोरिया नए वातावरण में समायोजित होने का प्रयास करते है|

समूहों का निर्माण- किशोरावस्था में किशोर व किशोरिया समूहों का निर्माण करने लग जाते है ये समूह स्थाई

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नैतिक विकास

हमारे सोच,व्यव्हार और भावनाओं में सही या गलत का बदलाव नैतिक विकास के अन्दर आता है|

एक व्यक्ति नैतिक निर्णय लेते समय कौन कौन से तर्क या वितर्क को ध्यान में रखता  है |व्यक्ति नैतिक परिस्थियों में कैसा व्यवहार करता है |नैतिक मुद्दों के बारे में लोग क्या सोचते है|

क्या है जो एक व्यक्ति का  नैतिक व्यक्तित्व बनाने के लिए जिम्मेदार होता है|

पियाजे का सिद्धांत - पियाजे

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सामाजिक अधिगम का सिद्धांत(social learning theory)- बांडूरा

सामाजिक अधिगम का सिद्धांत(social learning theory)- बांडूरा

अलबर्ट बांडूरा- कनाडा

प्रेक्षणात्मक  अधिगम का सिद्धांत

सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत (social cognitive theory)

प्रेक्षनात्मक अधिगम किसी दुसरे का प्रेक्षण

 

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गेस्टोल्ट सिद्धांत या सूझ एवम् अन्तदृष्टि (Gestalt or Insight theory)

गेस्टोल्ट का अर्थ- पूर्णाकार या समग्राकृति

गेस्टोल्ट सिद्धांत जर्मन स्कूल(1920) की देन है| इस सिद्धांत के प्रवर्तक बाद में अमेरिका चले गए थे|

इस सिद्धांत से सम्बन्ध रखने वाले मुख्य रूप से मैक्स वर्दिमर,कुर्क कोफ्का,कोहलर थे| मैक्स वर्दिमर इस सिद्धांत के प्रवर्तक थे और कोहलर व कोफ्का ने इस सिद्धांत को आगे बढाया| इस सिद्धांत के अनुसार वन मानुष पर प्रयोग करने वाले कोहलर थे|

कोहलर द्वारा जिस चिम्पेंजी पर प्रयोग किया गया था उसका नाम--सुल्तान

प्रयोग- चिम्पेंजी को एक खेल के पिंजरे में रखा गया उस बॉक्स में कुछ केले भी रखे गए जो चिम्पेंजी को पहुँच से दूर(ऊपर) थे| इसी पिंजरे में एक बॉक्स और डंडा भी रखा गया|  चिम्पेंजी को केले दिखाई दिए वो उनको खाना चाहता था पर केले बहुत ऊपर थे जहाँ तक चिम्पांजी के हाथ नहीं पहुँच रहे थे|

थोड़ी देर चिम्पांजी पिंजरे में घुमता रहा कुछ समय बाद एकाएक चिम्पांजी की अंतदृष्टि/सूझ विकसित हुई तो उसने उसने डंडा उठाया और बॉक्स पर चढ़कर केलों को डंडे से मरता रहा जिससे केले निचे आ गए|

चिम्पेंजी द्वारा जो अचानक क्रिया की गयी उसे कोहलर ने अंतदृष्टि अधिगम कहा है| उनके अनुसार किसी भी समस्या का समाधान एकाएक निकल जाता है|

इस सिद्धांत में कोहलर बताते है कि कोई भी समस्या उत्पन्न होने पर उसका समाधान उसी समय नहीं मिलता है बल्कि कुछ समय पश्चात् एकाएक उस समस्या का समाधान मिल जाता है|

सूझ के सिद्धांत का शिक्षा में महत्व-

बड़े बालकों के लिए उपयोगी जिनका मानसिक विकास अच्छे से हो चूका है|

ये सिद्धांत रटना और आदत बनाकर सिखने का विरोध करता है|

समस्या समाधान द्वारा सिखना इसी सिद्धांत पर आधारित है|

यह सिद्धांत अधिगमकर्ता में कल्पना,बुद्धि और तर्क का विकास करता है|

यहाँ सिद्धांत गणित विषय के लिए बहुत ही लाभकारी है|

यह सिद्धांत अनुसन्धान के क्षेत्र में बहुत ही महत्व रखता है|

यह सिद्धांत अधिगमकर्ता को स्वयं खोज करके सिखने के लिए प्रोत्साहित कर देता है|

यह सिद्धांत रचनात्मक कार्यों के लिए उपयोगी है|

यह सिद्धांत साहित्य,कला और संगीत के लिए बहुत ही उपयोगी है|

बालको के सामने वस्तु प्रस्तुत करने पर वे आवश्यक संबंधों का प्रत्यक्षीकरण शीघ्र कर लेते है|

सूझ के सिद्धांत के अधिगम के नियम-

1 समग्रता का नियम

2 समीपता का नियम

3 समापन का नियम

4 समानता का नियम

5 निरंतरता का नियम