व्यक्तित्व संरचना और फ्रायड का सिद्धांत

व्यक्तित्व संरचना और फ्रायड का सिद्धांत

मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत

फ्रायड ने सर्वप्रथम मन की तीन अवस्थाएं बताई है-

1 चेतन मन 10%
2 अचेतन मन 90%
3 अर्धचेतन मन

1 चेतन मन- इसका संबंध वर्तमान से होता है| यह वह भाग है जो तत्कालीन ज्ञान से संबंधित रहता है |

इस भाग में वह इच्छाएं, विचार एवं अनुभव होते हैं जिनका संबंध वर्तमान से|

2 अचेतन मन- अचेतन मन मन का वह भाग हैं जिस के विचारों एवं अनुभवों को पुनः चेतना में नहीं लाया जा सकता|

अचेतन मन में दमित इच्छा, विचार व अनुभव या तो दैनिक क्रियाकलापों में प्रकट होते हैं या सम्मोहन या अन्य प्रक्षेपी विधियों द्वारा इनको प्रकट करवाया जाता है|

अचेतन मन काम शक्ति का भंडार गृह होता है

अहम तथा पराहम द्वारा दमित इच्छा,विचार, भावनाएं, प्रेरणा, संवेग इसमें रहते हैं|
सपना अचेतन मन से ही आता है|

3 अर्धचेतन मन- चेतन तथा अचेतन मन के मध्य का भाग|

इसमें विषय न तो तत्काल चेतना में रहते हैं और ना ही अचेतन में, परंतु थोड़ा प्रयास करके इस भाग के विचारों इच्छा हो भागो को चेतन मन में लाया जा सकता है|

 

 

फ्राइड का मानना है कि व्यक्तित्व मुख्य तीन पद्धतियों इदम्, अहम एवं पराहम द्वारा मिलकर बना होता है|

व्यक्ति का व्यवहार इन तीनों पद्धतियों की अंतर क्रियाओं का परिणाम है|

इदम्(ID)- फ्राइड के अनुसार मानसिक संसार अथवा आंतरिक संसार का प्रतिनिधित्व करता है|

इसे वास्तविक मानसिक सत्यता कहा कहां है|
इदम् शुद्ध, असली, मूल, उर्जा का बना होता है|
इदम् पूर्ण तरह अचेतन स्तर पर रहता है|
इसे उचित अनुचित का ज्ञान नहीं होता है|

शारीरिक आवश्यकताओं की तत्कालिक संतुष्टि चाहता है एवं यह आनंद के नियम से शासित होता है|

अहम् (Ego)- यह वास्तविकता के नियम का पालन करता है|

यह इदम् व पराहम के मध्य संयोजन का कार्य करता है|

इदम् की स्वतंत्र एवं स्वछंद प्रवृत्तियों पर नियंत्रण करता है|

यह व्यक्ति की चेतन बुद्धि पर आधारित होता है| इसका संबंध वास्तविकता से होता है|

यह हमारी इच्छाओं तथा वास्तविकताओं के बीच संतुलन बनाए रखता है|
यह हमारे व्यवहार पर नियंत्रण रखता है|

पराहम (super ego )- यह व्यक्ति की सामाजिकरण की प्रक्रिया का मुख्य स्रोत है|

यह मुख्य रूप से चेतन होता है|
व्यक्ति की न्याय संबंधी प्रक्रियाओं की मुख्य कार्यशाला होता है|
पछतावे की भावना, आत्मग्लानि इसी वजह से आते हैं|
इसका विकास सबसे देरी से होता है|
यह आदर्शवादी या नैतिकता के सिद्धांत पर आधारित हैं|

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