Child Development and Pedagogy

शिक्षा मनोविज्ञान (Child Development and Pedagogy)

child development and pedagogy व्यक्ति की अन्तर्निहित शक्तियों का प्रकटीकरण EDUCATUM (लैटिन)  E(ई)-अन्दर से DUCO(ड्यूको)-बाहर निकलना, शिक्षा (संस्कृत) शिक्ष(धातु)-बाहर निकलना

शिक्षा(EDUCATION) ——- शिक्षित करना (EDUCARE),नेतृत्व देना (TO LEAD OUT),सामने लाना(TO BRING FORTH),ऊपर उठाना (TO BRING UP)

शिक्षा मनोविज्ञान की उत्पति 1900 ई॰ से हुई थी प्रथम शैक्षिक मनोवेज्ञानिक  – थोर्नडाइक

1920 ई॰ में स्पष्ट स्वरूप प्राप्त हुआ था – थोर्नडाइक,जड़,टरमन,स्टेनले हॉल

शिक्षा मनोविज्ञान की महत्वपूर्ण परिभाषाएं

“शिक्षा मनोविज्ञान व्यक्ति के जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक सिखने के अनुभवों का वर्णन तथा व्याख्या करता है”

“education psychology describes and explains the learning experiences of an individual form birth through old age”-crow and crow

“शिक्षा मनोविज्ञान मानवीय व्यवहार का शैक्षिक परिस्थितियों में अध्ययन करता है”

“Education psychology deals with the behavior of human being in education situations – B.F.skinner

“शिक्षा मनुष्य की समस्त शक्तियों का स्वाभाविक,प्रगतिशील एवं विरोधहीन विकास है-  पेस्टालाजी

शिक्षा के तत्व(Elements of Educational)

सिखने वाला  – क्या –  कैसे,   सिखाने वाला  – क्या – कैसे

शिक्षा मनोविज्ञान की प्रकृति(Nature of Educational Psychology)

वातावरण के आधार पर सफलता का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है| वस्स्तुपरक,पक्षपात रहित दृष्टिकोण, तर्क संगत,आगामी वृद्धि एवम् विकास का मार्ग दिखाना,वस्तुगत अवलोकन तथा प्रेक्षण पर जोर,विज्ञानं की तरह ही भविष्यवाणी संभव|

शिक्षा मनोविज्ञान का क्षेत्र (Scope of Educational Psychology)

बालक के सन्दर्भ में:- शारीरिक संरचना ,मानसिक संरचना,संवेगात्मक क्रियाये,सामाजिक क्रियाये अनुवांशिकता,वातावरण

शिक्षक के सन्दर्भ में: शिक्षक और उसका प्रशिक्षण,शिक्षक का व्यक्तित्व,शिक्षक का शारीरिक स्वास्थ्य,शिक्षक का व्यक्तित्व,शिक्षक का मानसिक स्वास्थ्य

सीखने की प्रक्रिया(Learning process):-

सीखने के नियम एवम् सिद्धांत,स्मृति एवम् विस्मृति,समस्या समाधान,प्रशिक्षण स्थानांतरण

शिक्षा-मनोविज्ञान की विधियाँ(Methods of Educational Psychology)

शिक्षा-मनोविज्ञान विज्ञानं की विधियों का प्रयोग करता है।

विज्ञानं की विधियों की विशेषताएं-विश्वनीयता,यतार्थता,विशुद्धता,वस्तुनिष्ठता एवं निष्पक्षता शिक्षा-मनोविज्ञान अपनी समस्याओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखतेहै और उनका समाधान करने के लिए वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग करते है।

शिक्षा मनोविज्ञान की विधियाँ

(1) आत्मनिष्ठ (2) वस्तुनिष्ठ

आत्मनिष्ठ विधियाँ

1. आत्मनिरिक्षण “मस्तिष्क द्वारा अपनी स्वयं की क्रियाओं का निरिक्षण” ये मनोविज्ञान की परम्परागत विधि है,इस विधि का सर्वप्रथम प्रयोग लॉक (locke) किया था

गुण:- मनोविज्ञान के ज्ञान में वृद्धि,यन्त्र वा सामग्री की आवश्यकता नहीं,प्रयोगशाला की आवश्यकता नहीं,मनोवेज्ञानिक का स्वयं का मस्तिष्क प्रयोशाला होता है

दोष:– वैज्ञानिकता का अभाव,ध्यान का विभाजन,असामान्य व्यक्तियों और बालकों के किये अनुपयुक्त,मन द्वारा मन का निरिक्षण असंभव,मानसिक प्रक्रियाओं का निरिक्षण असंभव,मस्तिष्क की वास्तविक दसा का ज्ञान असंभव,गाथा वर्णन विधि

“ पूर्व अनुभव या व्यवहार का लेखा-जोखा तैयार करना ”

“ गाथा वर्णन विभि की आत्मनिष्ठता के कारन इसके परिणामपर विश्वास नहीं किया जा सकता ”

-स्किनर

इस विधि का उपयोग पूरक विधि के रूप में किया जाता

वस्तुनिष्ठ विधियाँ:-

प्रयोगात्मक विधि:- “पूर्व निर्धारित दशाओं में मानव व्यवहार का अध्ययन” यह एक नियंत्रित परीक्षण की विधि है,इस विधि में योगकर्ता स्वयं द्वारा निर्धारित की हुई परिस्थितियों या वातावरण में किसी व्यक्ति के व्यवहार का अध्ययन करता है या किसी समस्या के बारे में तथ्य एकत्रित करता है|इस विधि का प्रयोग न केवल मनुष्यों के लिए वरन चूहों,बिल्ली आदि पशुओं के व्यवहार के अध्ययन के लिए भी किया जाता है

क्रो एवं क्रो:- “मनोवेज्ञानिक प्रयोगों का उद्देश्य किसी निश्चित परिस्तिथि या दशाओं में मानव व्यव्हार से सम्बंधित किसी विश्वास या विचार का परीक्षण करना है”

गुण:– 1.वैज्ञानिक विधि,निष्कर्षों की जाँच संभव,विश्वसनीय निष्कर्ष,शिक्षा सम्बन्धी समस्याओं का समाधान,उपयोगी तथ्यों पर प्रकाश|

दोष:-प्रयोग में कृत्रिमता स्वाभाविक,प्रयोज्य का सहयोग प्राप्त करने में कठिनाई,प्रयोज्य की मानसिक दशा का ज्ञान असंभव,प्रयोज्य की आतंरिक दशाओं पर नियंत्रण असंभव|

निरिक्षण विधि या बहिर्दर्शन विधि

“व्यवहार का निरिक्षण करके मानसिक दशा को जानना”

किसी भी व्यक्ति के व्यवहार,आचरण,क्रियाओं और प्रतिक्रियाओं को ध्यान पूर्वक देखकर उसकी मानसिक दशाओं का पता लगाना|

गुण:-बालकों का उचित दिशाओं में विकास,शिक्षा के उद्देश्यों और पाठ्यक्रम में परिवर्तन,बाल अध्ययन के लिए उपयोगी

दोष:-प्रयोज्य का अस्वाभाविक व्यव्हार,असत्य निष्कर्ष,आत्मनिष्ठता,स्वाभाविक त्रुटियाँ व अविश्वसनीयता

जीवन इतिहास विधि(case-history method)

“जीवन के इतिहास द्वारा मानव-व्यवहार का अध्ययन”

उपचारात्मक विधि “आचरण सम्बंधित जटिलताओं को दूर करने में सहायक”

विकासात्मक विधि “बालक की वृद्धि एवं विकास क्रम का अध्ययन”

मनोविश्लेश्नात्मक विधि “व्यक्ति के अचेतन मन का अध्ययन करके उपचार करना”

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