अनुकूलित अनुक्रिया का सिद्धांत और क्रिया प्रसूत अनुबंधन/Conditioned Response Theory/Classical Conditioning

अनुकूलित अनुक्रिया का सिद्धांत/Conditioned Response Theory/Classical Conditioning

इस सिद्धांत के अन्य नाम – 1प्राचीन अनुबंध 2 शास्त्रीय अनुबंध 3 सम्बद्ध प्रतिक्रिया  4 Conditioned Response Theory 5 Classical Conditioning 6 परम्परागत अनुकूलन प्रवर्तक- इवान पत्रोविच पावलोव(आई.पी.पावलोव)

इस सिद्धांत में बताया गया है कि सिखाना एक अनुकूलित अनुक्रिया है| अनुकूलन- अस्वाभाविक उद्दीपक के साथ स्वाभाविक अनुक्रिया करना|

UCS-   Unconditioned stimulus- अननुबंधित उद्दीपक – भोजन(स्वाभाविक उद्दीपक)

UCR-   Unconditioned Response- अननुबंधित अनुक्रिया- लार(स्वाभाविक अनुक्रिया)

CS –     Conditioned stimulus– अनुबंधित उद्दीपक- घंटी(अस्वाभाविक उद्दीपक)

CR-      Conditioned Response- अनुबंधित अनुक्रिया- लार(अस्वाभाविक अनुक्रिया)

UCS—————–UCR       स्वाभाविक उत्तेजक —————————-स्वाभाविक अनुक्रिया

UCS+CS———-UCR       स्वाभाविक उत्तेजक+अस्वाभाविक उत्तेजक—-स्वाभाविक अनुक्रिया

CS———————CR       अस्वाभाविक उत्तेजक—————————अस्वाभाविक अनुक्रिया

Conditioned Response Theory
Classical Conditioning

इस सिद्धांत के शैक्षिक निहितार्थ- विद्यार्थियों ने अच्छी आदतों का निर्माण करना-  माता बच्चों को सुबह नींद से जगाती है तो बालक उठ जाता है ये स्वाभाविक उद्दीपक से स्वाभाविक अनुक्रिया हुई, अब माता बालक को उठाने से पहले बल्ब जलती है बाद में आवाज लगाती है ये क्रिया ज्यादा समय तक होती है तो बालक बल्ब जलते ही उठ जायेगा|

पशुओं के प्रशिक्षण में-  यदि सर्कस के शेर  के प्रशिक्षण में सिखाया जाता है कि चाबुक से मारने पर शेर रिंग के अन्दर से छलांग लगाता है तो चाबुक  से मरना स्वाभाविक उत्तेजक हुआ,यदि चाबुक मारने से पहले किसी भोंपू की आवाज सुने जाती है तो थोड़े ही दिनों में शेर भोंपू व चाबुक से अनुबंध स्थापित कर लेता है और अब मात्र भोंपू बजने से वह छलांग मारता है|

भय दूर करने में-  बालक प्राय: पुलिस,डाक्टर,चूहा आदि को देखकर दर जाते है क्योकि उनके साथ वहा अनुबंध स्थापित कर चुके होते है| यदि इनके इस डर को दूर करना है तो प्रति अनुबंध के द्वारा किया जा सकता है|

इवान पत्रोविच पावलोव(1849-1936) रूस- शरीर विज्ञानी थे| इन्हें नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चूका है|

क्रिया प्रसूत अनुबंधन

सिद्धांत(1938) – बी. एफ. स्किनर- ब्युरहस फ्रेडरिक स्किनर (अमेरिका)

सिद्धांत के अन्य नाम:- सक्रिय अनुबंधन,नैमित्तिक अनुबंधन, कार्यात्मक प्रतिबद्धता

प्रयोग के लिए जीव :- कबूतर, चूहा

क्रिया प्रसूत– मानव व जानवरों की एच्छिक क्रिया जिनका प्राणी पर्यावरण में  सक्रिय रहकर उपयोग करता है|

प्रयोग:- स्किनर बॉक्स में भुखे चूहे को बंद किया जाता है जिसकी दिवार पर   एक लीवर लगा हुआ होता है जिसका सम्बन्ध बॉक्स की छत पर लगे हुए  भोजन  से होता है| उस बॉक्स में भूखे चूहे के द्वारा कई बार अनुक्रिया की जाती है  संयोग  से चूहे का पंजा उस लीवर पर पड जाता है और उसे छत पर लगे भोजन पात्र  से  भोजन(पुनर्बलन) मिल जाता है| धीरे-धीरे चूहे के द्वारा लीवर दबाने में कम  समय लगाने लगता है और एक समय ऐसा आता है कि चूहा बिना किसी  गलती  के सीधा लीवर पर पंजा लगता है|

 

इस सिद्धांत में स्किनर ने SR(थोर्नडाईक) को RS में बदल दिया क्योकि  इस सिद्धांत में पहले अनुक्रिया की जाती है बाद में भोजन(पुनर्बलन,उद्दीपक)  मिलता है|

शैक्षिक महत्त्व:-बालकों को अच्छे व्यवहार का पुनर्बलन तुरंत देना चाहिए जिससे वह बालक  पुनः अच्छा व्यवहार करने के लिए उद्दीप्त रहे|

किसी गलत कार्य के लिए ऋणात्मक पुनर्बलन देकर गलत कार्य को घटना  चाहिए|

इस सिद्धांत का प्रयोग बालक के वांचित व्यवहार में परिवर्तन लाने के लिए  किया जा सकता है|स्किनर शिक्षा में अभिप्रेरणा को बहुत ही अधिक बल देता है|

दैनिक जीवन में इस सिद्धांत के उदहारण:- जब घर पर कोई नहीं होता है  तब बालक घर में राखी मिठाई खोजने लगता है और उसे मिठाई मिलाने पर  पुनर्बलन मिलाता है| इस सिद्धांत में परिणाम से व्यवहार को सिखा जाता है|

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