राज्यपाल (governor)

राज्यपाल (governor)

राज्यपाल के अनुच्छेद

राज्यपाल राज्य की कार्यपालिका का प्रमुख व राज्य का संवेधानिक प्रमुख होता है| राज्य का प्रथम नागरिक राज्यपाल होता है|

राज्यपाल पद का सृजन- 1 नवम्बर 1956 को हुआ, प्रथम राज्यपाल गुरुमुख निहाल सिंह बने|

राज्यपाल के अनुच्छेद

अनुच्छेद 153– प्रत्येकज राज्य में एक राज्यपाल होगा| 7 वें संविधान संशोधन 1956 के तहत एक ही व्यक्ति दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है|

अनुच्छेद 154– कार्यपालिका की समस्त शक्तिया राज्यपाल में निहित होती है|

अनुच्छेद155-राज्यपाल की नियुक्ति केन्द्रीय मंत्री परिषद् की अनुशंसा पर राष्ट्रपति द्वारा की जाता है| राज्यपाल की नियुक्ति से पूर्व राष्ट्रपति द्वारा मुख्यमंत्री से सलाह लेना एक परंपरा है कोई संवेधानिक आवश्यकता नहीं है|

अनुच्छेद156– पदावधि, राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत अपने पद पर बना रह सकता है| सामान्यतः राज्यपाल का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है|

अनुच्छेद 157-राज्यपाल की योग्यताये,न्यूनतम आयु 35 वर्ष, संसद या राज्य विधायिका का सदस्य हो,भारत का नागरिक हो, शेष सामान्य पद वाली सभी योग्यताये अनिवार्य है|

अनुच्छेद 158– राज्यपाल पद की शर्ते

अनुच्छेद159– शपथ, राज्यपाल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के द्वारा, इनकी अनुपस्थिति में उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्याययाधीश द्वारा शपथ दिलाई जाती है|

अनुच्छेद161-क्षमादान की शक्ति, राज्यपाल राज्य सूचि में वर्णित विषयों पर दण्डित व्यक्ति को क्षमादान कर सकता है परन्तु मृत्यु दंड को केवल राष्ट्रपति ही क्षमा कर सकता है|

अनुच्छेद 163– राज्यपाल की शक्तियां, राज्यपाल में दो प्रकार की शक्तिया निहित होती है| 1- मुख्यमंत्री(मंरिपरिषद) के सलाह से प्रयोग करने वाली. 2- स्वविवेक के आधार पर प्रयोग की जाने वाली शक्तियां

अनुच्छेद 213(1)– राज्यपाल द्वारा आध्यादेश जरी करना|

राज्यपाल के वेतन व भतें

राज्यपाल का वर्त्तमान वेतन 110000 रुपये मासिक वेतन | कार्यकाल के दौरान वेतन व भतों में कोई भी कटौती नहीं की जा सकती है|

राज्यपाल की कार्यकारी शक्तियां (अनुच्छेद 154)

=>अनुच्छेद 164 के तहत राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है व उसकी सलाह से मंत्रियों की नियुक्ति और कार्य का विभाजन किया जाता है|

=>अनुच्छेद 165 के तहत राज्य के महाधिवक्ता व लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल के द्वारा होती है|

महाधिवक्ता राज्यपाल के प्रसाद पर्यंत अपने पद पर बना रह सकता है,

लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व अन्य सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा संविधान में विहित प्रक्रिया द्वारा हटाया जा सकता है|

=>समस्त विश्विद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति राज्यपाल के द्वारा की जाती है|

=>राज्य के लिए निर्वाचन आयुक्त (243 ट (K)) व  राज्य वित्त आयोग  (243 झ (I)) के तहत नियुक्ति सेवा व समयावधि और अन्य आयोगों के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति करता है|

=>मुख्यमंत्री व अन्य मत्रियों के त्यागपत्र स्वीकारना,शपथ दिलाना और उनको पदच्युत करना|

=>विधानसभा में आंग्ल भारतीय समुदाय के सदस्य को मनोनीत करना|

=>मुख्यमंत्री से राज्य प्रशासन व विधायन से सम्बंधित सूचना मांग सकता है|

=>राज्य के लोकायुक्त की नियुक्ति करना|

=>अनुच्छेद [171(3) ड.] के तहत  विधानपरिषद में 1/6 सदस्यों को मनोनीत करना जो साहित्य,विज्ञानं,सहकारी या समाज सेवा, कला से सम्बंधित हो|

=>अनुच्छेद 31- के तहत सिविल सेवा (RAS) राज्यपाल के नाम से ही नियुक्त होते है और ये सभी राज्यपाल के प्रसाद पर्यंत अपने पद पर बने रह सकते है| सामान्यत: इनकी सेवावधि 60 वर्ष की आयु होने तक होती है|

=> राज्यपाल मंत्रीपरिषद् का अभिभावक व मार्गदर्शक होता है|

राज्यपाल की विधायी शक्तियां

राज्यपाल व्यवस्थापिका का प्रमुख होता है|

अनुच्छेद 174 के अनुसार विधानसभा का अधिवेशन बुलाना,सत्रावसान,स्थगन व विधानसभा भंग करने का अधिकार राज्यपाल के पास होता है|

राज्यपाल विधानमंडल के प्रथम सत्र को संबोधित करता है| राज्यपाल दोनों सदनों (विधान परिषद् व विधान सभा) को अलग-अलग या संयुक्त रूप से संबोधित कर सकता है|

अनुच्छेद 200 के अनुसार विधेयक बिना राज्यपाल के हस्ताक्षर के कानून नहीं बन सकता है| राज्यपाल विधेयक पर हस्ताक्षर कर सकता है या पुनर्विचार के लिए भेज सकता है या विधेयक राष्ट्रपति के पास विचारार्थ भेज सकता है|

इस स्थिति में यदि विधेयक संसोधन कर के या बिना संसोधन के पुन: राज्यपाल के पास भेजा जाता है तो राज्यपाल को हस्ताक्षर करने अनिवार्य होते है|

वित्त विधेयक विधान मंडल के पास पुनर्विचार के लिए नन्हीं भेज सकता है|

विधान सभा या विधान परिषद में अध्यक्ष का पद रिक्त होने पर राज्यपाल किसी भी सदस्य को अध्यक्षता के लिए नियुक्त कर सकता है|

अनुच्छेद 213(1) के तहत आध्यादेश जारी कर क़ानून निर्माण का अधिकार  राज्यपाल को होता है|

आध्यादेश राष्ट्रपति या मुख्यमंत्री की सलाह पर ही जारी कर सकता है| आध्यादेश विधानसभा सत्र प्रारंभ होने से 6 माह तक ही प्रभावी रह सकता है|

कुछ परिस्थितियों में बिना राष्ट्रपति की अनुमति के आध्यादेश जारी नहीं किया जा सकता है|

 न्यायायिक शक्तियां-

राष्ट्रपति के परामर्श से उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करना

अनुच्छेद 233- उच्च नयायालय के मुख्य नयायाधीश के परामर्श से जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति व पदोन्नति

राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियां(राज्यपाल के अनुच्छेद 163)

राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों के विरुद्ध न्यायालय में चुनौती नहीं दि जा सकती है|

विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग करते समय राज्यपाल को मंत्री परिषद् की स्वीकृति लेना अनिवार्य नहीं है|

विवेकाधीन शक्तियों के प्रयोग के समय राज्यपाल “संघ सरकार के प्रतिनिधि” के रूप में कार्य करता है|

विशेष

संसदीय शासन प्रणाली के कारन राज्यपाल कार्यपालिका का नाम मात्र का प्रधान होता है|

व्यवहारिक रूप से राज्य के मुख्य कार्यपालक की भूमिका निर्वहन करता है|

राष्ट्रपति शासन के समय राज्य का वास्तविक प्रशासक|

अनुच्छेद160- राष्ट्रपति राज्यपाल को उन सभी आकस्मिक स्थितियों में कार्य करने का अधिकार दे सकता है जिसमे संविधान मौन है|

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *